वीडियो जानकारी: 11.07.23, गीता समागम, ग्रेटर नोएडा Title : तन को रोटी चाहिए और मन को राम || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी चेतना और पदार्थ के संबंध पर गहराई से चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी बताते हैं कि चेतना शरीर से तो उत्पन्न होती है, लेकिन उसका लक्ष्य शरीर में बंधे रहना नहीं, बल्कि उससे ऊपर उठना है। जब तक चेतना पदार्थ से अपनी पहचान लेती रहती है, तब तक वह दुःख और बंधन में फँसी रहती है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि मुक्ति का अर्थ शरीर या संसार से भागना नहीं है, बल्कि उनके साथ रहकर भी उनमें लिप्त न होना है। यही “मुक्त पुरुष” की अवस्था है — जहाँ चेतना स्वतंत्र है, किसी भी बाहरी वस्तु या परिस्थिति से प्रभावित नहीं। जैसे की भगवद् गीता में श्री कृष्ण कहते हैं — “न भोग चाहिए, न त्याग चाहिए, तुम्हें चाहिए केवल बोध।”