वीडियो जानकारी: 01.09.25, बोध प्रत्यूषा Title : दुनिया बदलनी है? पहले खुद को देखो || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति पर (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी शून्यता सप्तति (छंद 28) के संदर्भ में जीवन के असली सहारे और संसार-अहंकार के संबंध पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि हम जिस संसार को सच मानते हैं, वह हमारे ‘मैं’ पर निर्भर है; जैसे हम होते हैं, दुनिया हमें वैसी ही दिखाई देती है। आचार्य जी बताते हैं कि जो भी चीज़ अपने अस्तित्व के लिए किसी दूसरे पर टिकी है, वह भरोसे लायक नहीं हो सकती, इसलिए संसार और अहंकार दोनों एक-दूसरे पर आश्रित हैं। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि जब हम अस्थायी चीज़ों, रिश्तों या स्थितियों को जीवन का आधार बना लेते हैं, तभी बेचैनी और दुख पैदा होता है। सच्चा सहारा वह है जो बदलता नहीं और किसी पर निर्भर नहीं है; जब जीवन का आधार ‘वो’ बन जाता है, तब भीतर स्थिरता आती है।