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प्रेम हो और घाव न हो — ये संभव नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2023)
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3 months ago
Description

वीडियो जानकारी: 22.05.23, गीता समागम Title : प्रेम हो और घाव न हो — ये संभव नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी संत कबीर के दोहे ‘सूरा सो सूरा मिले, घायल मिला न कोय” पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी स्पष्ट कर रहे हैं कि सच्चा वीर वह नहीं जो दूसरों को चोट पहुँचाए, बल्कि वह है जो स्वयं घायल होने को तैयार हो। आचार्य जी समझा रहे हैं कि प्रेम और सत्य का मार्ग दर्द से होकर गुजरता है, और जो चोट खाने से डरता है, वह प्रेम के योग्य नहीं है। वे बताते हैं कि घायल होना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति का प्रमाण है। जीवन में टूटना, बिखरना और हारना सीखना ही आत्मा की परिपक्वता की निशानी है। जो व्यक्ति दर्द को स्वीकार कर लेता है, वही सच्चे प्रेम और ईश्वर तक पहुँच पाता है।