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कोमल नहीं — जूझती हुई महिला चाहिए || आचार्य प्रशांत (2025)
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3 months ago
Description

वीडियो जानकारी: 03.11.25, कोलकाता Title : नाज़ुक नहीं, निडर बनो — यही असली जीत है || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी महिला क्रिकेट टीम की जीत पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझा रहे हैं कि यह जीत सिर्फ खेल की नहीं, बल्कि महिलाओं की सोच और आज़ादी की भी जीत है।वे समझा रहे हैं कि जब स्त्री खेल के मैदान में उतरती है, तो वह उन सदियों पुरानी भूमिकाओं को चुनौती देती है जहाँ उसे ‘कोमलांगी’ और ‘छुईमुई’ बनाकर पूज तो लिया गया, पर दबाया भी गया। यह जीत क्रिकेट की नहीं, उस सोच की हार है जो मानती थी कि स्त्री कमजोर है, भावुक है, निर्भर है। आचार्य जी बताते हैं कि खेल, नौकरी और जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं को और आगे बढ़ने की ज़रूरत है। जीत का असली मतलब है कि लड़की डरकर नहीं, हिम्मत से आगे बढ़े। असली सशक्तिकरण तभी है जब हर लड़की जूझना सीखे, सिर उठाना सीखे — क्योंकि कप उठ गया है, पर जंग अभी बाकी है।