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ज़िंदगी के इतने क़रीब आओ — कि झूठ टूटने लगे
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1 month ago
Description

वीडियो जानकारी: 20.09.25, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा Title : आराम नहीं, सच्चाई चुनने की कीमत चुकानी पड़ती है || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी एक युवती के सवाल पर बात करते हैं, जहाँ वह पूछती है — “आचार्य जी, मुझे दार्शनिक बनना है।” आचार्य जी बताते हैं कि समझ केवल पढ़ाई या किताबों से नहीं आती, बल्कि ज़िंदगी के अनुभव, टूटन और मुश्किल दौर से सीखकर आती है। वे कहते हैं कि जब इंसान अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को ध्यान से देखना शुरू करता है, तब उसे खुद के बारे में साफ़ समझ आने लगती है। आरामदायक सोच और बनी–बनाई धारणाएँ टूटती हैं, तो जीवन का असली रूप सामने आता है। आचार्य जी समझाते हैं कि जब हम अपनी परिस्थिति और अपनी प्रतिक्रिया — दोनों को एक साथ देखते हैं, तभी सही समझ विकसित होती है। यह वीडियो उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो खुद को बेहतर समझना और ज़िंदगी से सीखना चाहते हैं।