वीडियो जानकारी: 23.07.25, बोध प्रत्यूषा, गोवा Title : क्या तुम सच में कमज़ोर हो? || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी से प्रश्नकर्ता के सवाल का जवाब देते हुए समझाते हैं कि खुद को “झुन्नू” मानना या बार-बार अपनी गलती लिखना तब तक निरर्थक है जब तक उसमें दर्द और लज्जा न हो। असली स्वीकार वही है जिसमें चोट लगे और भीतर से हिलना पड़े। अगर स्वीकार मज़े या आदत के लिए है तो वह केवल अहंकार को बचाने का तरीका है, बदलाव का साधन नहीं। आचार्य प्रशांत बताते हैं कि साहस छवि बचाने में नहीं, टूटकर बिखरने में है। सत्य कभी नहीं टूटता, टूटने वाला हमेशा अहंकार होता है। ज़िंदगी जब चोट देती है तो सुपरमैन बनने की बजाय उसे हमें तोड़ने देना चाहिए—क्योंकि टूटने से ही प्रायश्चित और परिवर्तन संभव होता है।