वीडियो जानकारी: 19.10.25, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा Title : 'मेरे जैसे मत बनो'- क्यों कह रहे हैं आचार्य जी? || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी द्वारा लिखी गई किताब Truth Without Apology की बुक साइनिंग इवेंट्स से कुछ दुर्लभ और आत्मीय पल सहेजे गए हैं। गीता दीपोस्त्सव के मौके पर हर कोई बेहद उत्साहित था | इसी बीच, प्रश्नकर्ताओं के सवालों का जवाब देते हुए आचार्य जी कहते हैं — “मत बनो मेरे जैसा, मैं ख़ुद परेशान हूँ अपने जैसा होकर।” वे बताते हैं कि उनका संघर्ष कोई आदर्श नहीं, बल्कि समय की मजबूरी है। सच्चा स्वभाव तो विश्राम और सहजता का है, संघर्ष तो बस तब तक है जब तक गंदगी है। संघर्ष तब तक ज़रूरी है जब तक अन्याय और गंदगी है — ताकि आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष न करना पड़े। वे कहते हैं — “मैं लड़ रहा हूँ ताकि तुम शांति से खेल सको; मेरे जैसा जीवन किसी को न जीना पड़े, यही मेरी चाह है।”