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सेलिब्रिटीज़ के रिश्ते हमारे लिए तमाशा क्यों बन जाते हैं? || आचार्य प्रशांत (2025)
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Description

वीडियो जानकारी: 09.12.25, वेदांत संहिता, मुंबई Title : रिकॉर्ड बना दिए, ट्रॉफी जीत ली! पर समाज को मज़ा सिर्फ़ निजी बातों में || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में प्रश्नकर्ता पूछते है कि हाल ही में एक राष्ट्रीय महिला क्रिकेटर की निजी जीवन से जुड़ी खबर (उनकी शादी टूटने की) सोशल मीडिया और मीडिया में अत्यधिक तूल पकड़ रही है, जबकि उनकी खेल-प्रतिभा और संघर्ष पर कहीं बात नहीं होती। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि समाज को सत्य या उत्कृष्टता (Excellence) में रुचि नहीं होती, उसे बस शरीर और निजी जीवन की सनसनी में मज़ा आता है। आचार्य जी समझाते हैं कि हम गहरी यौन-दमन (sexual repression) वाली मानसिकता में जी रहे हैं, इसलिए किसी खिलाड़ी की जीत नहीं, उसकी निजी या यौन-ज़िंदगी ही चर्चा का विषय बन जाती है। जब तक समाज दमन और वासना के चक्र में फँसा रहेगा, प्रतिभा को सम्मान नहीं मिलेगा—गॉसिप हमेशा खेल की जीत पर भारी पड़ेगी।