वीडियो जानकारी: 11.04.23, गीता समागम Title : बाज़ार में हूँ, पर खरीददार नहीं || आचार्य प्रशांत (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी बता रहे हैं कि मुक्ति का मतलब संसार से भाग जाना नहीं होता, बल्कि संसार में रहते हुए भी उससे अछूते रहना होता है। वे समझाते हैं कि मुक्त व्यक्ति भी कर्म करता है, लेकिन उसका कर्म किसी प्रतिक्रिया या विवशता से नहीं, आत्मा से प्रेरित होकर होता है। आचार्य जी बताते हैं कि जैसे सागर सब नदियों को स्वीकार करता है पर खुद नहीं बदलता, वैसे ही मुक्त व्यक्ति हर स्थिति में अडोल रहता है। गुरु भी इसी संसार में होता है, पर उसका एक सिरा माया में और दूसरा मुक्ति की ओर होता है — वही सेतु है जो हमें पार ले जाता है।