वीडियो जानकारी: 30.08.24, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नोएडा Title : भविष्य की महानता नहीं, वर्तमान की क्षुद्रता देखो || आचार्य प्रशांत, लाओत्सु पर (2024) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ताओ ते चिंग के अध्याय 8, भाग 3 पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने समझाया है कि असल में महानता कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, बल्कि केवल भविष्य से जुड़ी एक चाह है। जब इंसान भविष्य की महानता, सपनों और आदर्शों में उलझा रहता है, तब वह अपने वर्तमान की कमज़ोरियों और सच्चाई से भागता है।साधु कभी महान बनने की कोशिश नहीं करता, इसलिए वह अपने आप में महान होता है आचार्य जी बताते हैं कि हमारे सारे सपने और आदर्श, वर्तमान की ही कमज़ोरियों का दोहराव हैं, वे हमें कोई नया जीवन नहीं देते। नया तभी आता है जब इंसान अपने वर्तमान को साफ़ करे और उसकी कमियों को दूर करे। अगर वर्तमान मजबूत है तो भविष्य अपने आप अच्छा होगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्यात्म भविष्य की योजनाओं या आदर्शों में नहीं, बल्कि आज के जीवन की सच्चाई को पहचानने और उसे सुधारने में है। यह वीडियो उन सभी के लिए है जो भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान में जीना चाहते हैं और जीवन की गहराई को समझना चाहते हैं।