वीडियो जानकारी: 18.09.25 ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर, नई दिल्ली Title : सही काम चुनों, डूब के करो || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वार्ता में आचार्य प्रशांत इमर्स्ड (डूबे हुए) और लॉस्ट (खोए हुए) होने के बीच का अंतर स्पष्ट करते हैं। वे बताते हैं कि जब इंसान सही कार्य में पूरी तरह डूब जाता है, तो बाहर से देखने वाले को यह थकावट या बोझ जैसा लग सकता है, लेकिन वास्तव में वही सबसे प्रेममयी और सार्थक जीवन है। इसके विपरीत, अधिकतर लोग जो खोए हुए नज़र आते हैं, वे बस अचेतनता में बह रहे होते हैं—जैसे हवा में उड़ता पत्ता। सही कार्य में डूबना दुर्लभ है, यह मेहनत, साहस और समर्पण माँगता है। आचार्य जी कहते हैं कि जीवन में ग़ुलामी तो करनी ही है—पर यह तय करना ज़रूरी है कि हम अचेतनता की ग़ुलामी करेंगे या गहरे होश की।