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तीन साल की बच्ची का संथारा? किस ओर जा रहा है धर्म? || आचार्य प्रशांत (2025)
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5 months ago
Description

वीडियो जानकारी: 03.06.25, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा Title : तीन साल की बच्ची का संथारा? किस ओर जा रहा है धर्म? || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी जैन धर्म की संथारा प्रथा के समयानुसार सही और ग़लत प्रयोग पर चर्चा कर रहे हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि तीन वर्ष की बच्ची को ज़बरन भूखा रखकर मरने देना संथारा नहीं, बल्कि क्रूरता है। संथारा केवल उसी स्थिति में सार्थक हो सकता है जब कोई बुज़ुर्ग या असाध्य रोगी स्वयं, पूरी चेतना और विवेक से गरिमापूर्ण विदाई का निर्णय ले। आचार्य जी बताते हैं कि भारत में वॉलंट्री यूथनेशिया (Voluntary Euthanasia) को वैधानिक मान्यता न देने के पीछे सामाजिक-आर्थिक हालात, भ्रष्टाचार और भावनात्मक अस्थिरता कारण हैं। वे स्पष्ट करते हैं कि जीवन की रक्षा उतनी ही ज़रूरी है जितना सही समय पर प्राण अर्पण; अंधविश्वास या आवेश में प्राण गंवाना मूर्खता है। यह वीडियो उन सभी के लिए है जो धार्मिक प्रथाओं की आड़ में हो रही हिंसा, जीवन की पवित्रता और सचेत निर्णय की महत्ता को समझना चाहते हैं।