वीडियो जानकारी: 15.04.2025 , ग्रेटर नोएडा Title: ज़िंदगी दो बातों की — एक आग, एक आशिकी || आचार्य प्रशांत (2025) 📰 Source : https://docs.google.com/document/d/1s... 📋 Chapters: 00:00 - Intro 01:30 - काम आशिकी कैसे बने? 10:04 - असली कर्मयोगी कौन? 20:45 - बेधड़क जीने का सूत्र 27:57 - तुम आग की औलाद हो 37:03 - Testimonials विवरण: क्यों हमारी ज़िंदगी बुझी हुई मोमबत्ती जैसी लगने लगती है? बाहर से मीटिंग्स, डेडलाइन्स और सोशल मीडिया की भागदौड़, लेकिन भीतर सिर्फ़ थकान और खालीपन। आचार्य प्रशांत जी इस संवाद में बताते हैं—कमी काम की नहीं, बल्कि उस आग की है जो जीवन को प्रेम-यज्ञ बना देती है। वे समझाते हैं कि ज्ञान राख नहीं, अंगार है; और असली प्रेम वह है जो किसी परिणाम की परवाह किए बिना हर कर्म को अनंत उत्साह से भर दे। क्या आप भी जानना चाहते हैं कि कैसे बिना इनाम और तारीफ़ की चिंता किए फिर से ज़िंदगी में प्रेम और आग जगाई जा सकती है तो यह वीडियो आपके लिए है।