वीडियो जानकारी: 23.11.24, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नोएडा Title : जहाँ अधिकार है, वहाँ प्रेम नहीं || आचार्य प्रशांत, लाओत्सु पर (2024) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: हिन्दी अनुवाद: ‘क्या आप लोगों से प्रेम कर सकते हैं, और उनका मार्गदर्शन उदाहरण बनकर, न कि अपनी इच्छाओं को उन पर थोप कर कर सकते है? क्या आप महत्वपूर्ण मुद्दों को सिर्फ उपस्थित रहकर संभाल सकते हैं, घटनाओं को उनके स्वाभाविक क्रम में घटने देकर? क्या आप अपने विचारों के निरंतर शोर से पीछे हटकर वास्तविकता को स्पष्टता से देख सकते हैं?’ ~ ताओ ते चिंग (10.2) ‘जीवन देना, पोषण करना बिना अधिकार के, बिना आसक्ति के कर्म करना, नेतृत्व करना पर नियंत्रण का प्रयास नहीं करना – यही सर्वोच्च गुण है’ ~ ताओ ते चिंग (10.3) इस वीडियो में आचार्य जी ताओ ते चिंग के अध्याय 10 (भाग 2 और 3) के आधार पर संबंधों की वास्तविकता पर लाओत्सु के गहरे विचारों की चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी बताते हैं कि अधिकतर रिश्ते केवल स्वार्थ और शोषण पर टिके होते हैं, जिन्हें हम नैतिकता, कर्तव्य और धर्म का नाम देकर वैध ठहराते हैं। उन्होंने समझाया है कि उपनिषदों के अनुसार गलत संबंध ही नर्क हैं, और मुक्त जनों की संगति ही स्वर्ग है। मुक्ति किसी चालाकी से नहीं, बल्कि नग्न ईमानदारी और स्पष्टता से मिलती है। जब रिश्ता गणित, लाभ-हानि और चालाकी पर टिका हो, तो वहाँ प्रेम संभव नहीं होता। यह वीडियो उन सभी के लिए है, जो रिश्तों की सच्चाई को समझकर प्रेम और स्वतंत्रता के उच्चतर तल पर जीना चाहते हैं।