➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #krishna #doubt #selfknowledge #spirituality #bhagavadgita #ego #selfawareness #Truth #vedanta वीडियो जानकारी: 02.09.2024, गीता समागम, गोवा Title : संशय क्यों आपको भीतर से तोड़ देता है? || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2024) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी भगवद् गीता के अध्याय 4 श्लोक 40 पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि संशय केवल साधारण शंका नहीं, बल्कि अहंकार का केंद्रीय गुण बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं को सही रूप में नहीं जानता, तो भीतर की असुरक्षा बाहर की दुनिया पर शक के रूप में प्रकट होती है। व्यक्ति अपने दोषों को देखने के बजाय संसार को दोषपूर्ण मानने लगता है, जिससे उसका भ्रम और दुख बढ़ता है। आत्मअज्ञान व्यक्ति को झूठी पहचानों में बांध देता है और संशय धीरे-धीरे उसकी पूरी दृष्टि को नियंत्रित करने लगता है। आचार्य जी बताते हैं कि वास्तविक विनाश तब होता है जब मनुष्य संशय को ही सत्य मान बैठता है। मुक्ति का मार्ग बाहरी दुनिया पर शक करने में नहीं, बल्कि स्वयं को ईमानदारी से देखने में है। ➖➖➖ अर्जुन उवाच अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति । नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः ।। ~भगवद् गीता (4.40) काव्यात्मक अर्थ: स्वयं को सत्य कहे सत्य पर संशय करे विनष्ट है मतिभ्रष्ट है आँख खुद पर ना मुड़े ~भगवद् गीता (4.40)