वीडियो जानकारी: 08.07.23, गीता समागम, ग्रेटर नोएडा Title : मुक्ति की ओर जाने का एकमात्र कदम || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी निष्काम कर्म, आत्मज्ञान, प्रेम और आत्मावलोकन पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी स्पष्ट कर रहे हैं कि आत्मज्ञान में निष्कामता नहीं दिखती, बल्कि अपनी कामनाएँ और भीतर का कपट दिखाई देता है — और यही सच्ची जागरूकता की शुरुआत है। वे समझा रहे हैं कि निष्काम कर्म वही है जहाँ “करने वाला” ही नहीं बचता, क्योंकि जब तक करता या ज्ञाता है, तब तक कामना बनी रहती है। आचार्य जी बताते हैं कि गंदगी को देख लेना ही उसकी सफाई है, देखने मात्र से भीतर की अशुद्धता मिटने लगती है। हम आनंद पाकर भी दुख का मुखौटा पहन लेते हैं, और मुक्ति तभी है जब हम अपने मिथ्याचार, वासना और झूठ को निडर होकर स्वीकार लें। आचार्य जी बताते हैं कि जो बार-बार दोहराया जा रहा है, उसमें गड़बड़ है — आत्मा मौलिक है, वही दोहराव से मुक्त है।