➖➖➖➖➖➖ वीडियो जानकारी: 06.03.24, वेदान्त संहिता, ग्रेटर नॉएडा ~~~~ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी ने मातृत्व, परिवार और सामाजिक मान्यताओं पर चर्चा की है। उन्होंने बताया कि समाज में यह धारणा है कि दो बच्चे होना आवश्यक है, ताकि बच्चे अकेले न रहें। आचार्य जी ने इस विचार को चुनौती दी और कहा कि हम केवल एक या दो बच्चों के माता-पिता क्यों बनें, जबकि हम अनेकों के माता-पिता बन सकते हैं। आचार्य जी ने यह भी बताया कि परिवार का असली अर्थ केवल खून के रिश्तों से नहीं है, बल्कि प्रेम और चेतना से है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे भाई-भाई का रिश्ता केवल खून के रिश्ते पर निर्भर नहीं करता, बल्कि प्रेम और समझ पर भी आधारित होता है। आचार्य जी ने यह स्पष्ट किया कि मातृत्व केवल एक भाव नहीं है, बल्कि यह एक भौतिक और रासायनिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि असली प्रेम और संबंध चेतना से बनते हैं, न कि केवल शारीरिक संबंधों से। अंत में, आचार्य जी ने यह कहा कि हमें अपने बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि परिवार का असली अर्थ क्या है और हमें अपने रिश्तों को प्रेम और समझ के आधार पर बनाना चाहिए।