वीडियो जानकारी: 16.09.25, बोधस्थल, ग्रेटर नोएडा Title : इस बछिया को मिला आचार्य जी का प्यार || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: बोधस्थल में बचाई गई इस नन्ही बछिया की कहानी करुणा और क्रूरता, दोनों का आईना है। उसकी माँ सड़क दुर्घटना में मारी गई, और वह तीन दिन तक वहीं भूखी-प्यासी खड़ी रही, मानो उम्मीद भी छोड़ चुकी थी। संस्था के सदस्यों ने उसे बचाया, अस्पताल ले गए, और धीरे-धीरे उसने फिर से जीना सीखा। आज, आचार्य जी के साथ उसकी दोस्ती भरोसे, करुणा का प्रतीक है। लेकिन सोचिए—ये माँ-बेटी सड़क पर थीं ही क्यों? आचार्य जी कई बार समझा चुके हैं कि दूध के नाम पर जानवरों का शोषण होता है—उपयोगी न रहने पर उन्हें काट दिया जाता है या सड़कों पर छोड़ दिया जाता है। हर गिलास दूध के पीछे जंजीरें, बिछड़े बछड़े, ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन और मासूमों की पीड़ा छिपी है। हर गिलास दूध के पीछे छुपा है उनका दर्द।