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न जन्म, न मृत्यु, न जीवन – केवल शून्यता || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति पर (2023)
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Description

वीडियो जानकारी: 21.09.23, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नोएडा Title: न जन्म, न मृत्यु, न जीवन – केवल शून्यता || आचार्य प्रशांत, शून्यता सप्तति पर (2023) 📋 Chapters 0:00 Intro 1:09 जन्म, मृत्यु और दुख का रहस्य 11:09 दुख का कारण 19:32 शून्यता क्या है? 25:50 उत्पत्ति और विनाश 35:40 पुनर्जन्म या निर्वाण? 42:17 सत और असत का भ्रम 1:03:18 बुद्ध और कृष्णमूर्ति 1:10:19 क्या तथ्य भी झूठे हैं? 1:20:04 समापन ➖➖➖➖➖➖ विवरण: बुद्ध ने स्थिति, उत्पत्ति, विनाश, सत्, असत्, हीन, मध्यम, उत्कृष्ट आदि का उल्लेख लोक व्यवहार का अनुसरण करते हुए किया है, न कि इसलिए कि ये तत्वतः हैं। ~ शून्यता सप्तति (छंद - 1) इस वीडियो में आचार्य प्रशांत नागार्जुन की शून्यता सप्तति के छंद - 1 पर चर्चा करते हुए बताते हैं कि बुद्ध, नागार्जुन और वेदांत की शिक्षाओं का मूल प्रश्न दुख से मुक्ति है। बुद्ध ने करुणा से प्रेरित होकर शून्यता का मार्ग दिखाया, जहाँ जन्म, मृत्यु और अस्तित्व की सारी धारणाएँ निराधार साबित होती हैं। नागार्जुन ने इसी शून्यवाद को तार्किक कसौटी पर रखकर स्पष्ट किया कि उत्पत्ति, स्थिति और विनाश — तीनों ही स्वभाव से शून्य हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि व्यवहारिक सत्य, प्रातिभासिक सत्य और पारमार्थिक सत्य—ये तीन स्तर मानव अनुभव को समझने के लिए आवश्यक हैं। साधारण लोग कल्पनाओं और सामूहिक झूठ (व्यवहारिक सत्य) में जीते हैं, जबकि अंतिम सत्य शब्द और तर्क से परे है। यही अद्वैत और शून्यवाद का संगम है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि दुःख का असली कारण बाहरी वस्तुएँ नहीं, बल्कि ‘मैं’ की भ्रांति है। जब यह समझ में आता है कि सब कुछ स्वभाव से शून्य है, तभी मुक्ति और निर्वाण सम्भव होते हैं।