Video Information: 21.02.25, गीता समागम, ग्रेटर नोएडा Title: मुझे डर है कहीं मैं आपसे दूर न हो जाऊँ || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत जी जुड़ाव बनाए रखने, भटकाव से बचने और मिशन के साथ लंबे समय तक चलने पर गहराई से चर्चा कर रहे हैं। वे कहते हैं कि इस मार्ग पर कोई स्थायी गारंटी नहीं होती, क्योंकि माया हमेशा सक्रिय रहती है। इसलिए आत्मविश्वास से ज़्यादा ज़रूरी है सजगता और सतर्कता—यही असली सहारा है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि संस्था का केंद्र आध्यात्मिक है, पर उसका कार्य-शरीर पूरी तरह पेशेवर और गतिशील है, जिससे टिके रहना आसान नहीं होता। इस संयोजन में गहराई भी चाहिए और निरंतर गति भी, और यही चुनौती अक्सर लोगों को पीछे हटा देती है। आचार्य जी समझाते हैं कि वास्तविक निकटता का अर्थ है ज़िम्मेदारी, अनुशासन और मिशन में सक्रिय योगदान, न कि केवल भावनात्मक जुड़ाव। वे बताते हैं कि इस मार्ग पर टिके रहना निरंतर सजगता, कर्म और त्याग की मांग करता है, और स्थिरता बाहरी आश्वासन से नहीं बल्कि भीतर की जागरूकता से आती है।