वीडियो जानकारी: 04.05.25, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा Title : सिंगल मदर हूँ, बच्चों को सही राह कैसे दूँ? || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी एक महिला प्रश्नकर्ता (एक सिंगल मदर) के सवाल पर चर्चा कर रहे हैं कि बच्चों को अंधे कर्मकांड और रिवाज़ों से कैसे बचाएँ और उन्हें सच्चा धर्म कैसे समझाएँ। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि असली धर्म वही है जो सचमुच ज़रूरी हो, बाकी सब रिवाज़ हमें केवल डर और भ्रम में बाँधते हैं। गीता के पहले अध्याय का अर्जुन भी इसी मोह और अंधविश्वास में फँसा था—और हमारी स्थिति भी अक्सर वैसी ही होती है। आचार्य जी बताते हैं कि डर और हीनभावना केवल कल्पनाएँ हैं, जिनका इलाज तर्क से नहीं बल्कि कर्म के प्रमाण से होता है। खासकर महिलाओं और लड़कियों के लिए—जो अक्सर घरेलू हिंसा, सामाजिक दबाव और ‘तुमसे नहीं होगा’ जैसी बातें झेलती हैं—आचार्य जी का संदेश बेहद प्रासंगिक है: काम में डूबो, खुद को साबित करो। जब इंसान सार्थक नौकरी या सही काम में पूरी ताक़त से लग जाता है तो आत्मविश्वास अपने आप आता है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि खाली दिमाग़ ही पुरानी यादों और एस्केपिंग की आदतों (जैसे बार-बार खाने की सोच) को जन्म देता है। लेकिन जब जीवन सार्थक काम से भर जाता है, तो डर, असुरक्षा और हीनभावना सब मिट जाते हैं।