वीडियो जानकारी: 16.08.2025, गीता समागम, गोवा Title: सही काम में विरोध मिले तो मुझे याद कर लेना! || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी बताते हैं कि सत्य पर किसी की निजी मिल्कियत नहीं होती — न उसका कॉपीराइट होता है, न अधिकार। हर व्यक्ति को सच को आगे बाँटने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि भीतर का केंद्र भी सच्चा हो। यदि स्वार्थ या मान-सम्मान की चाह भीतर छिपी है, तो वही विकृति दूसरों तक पहुँचती है। आचार्य जी समझाते हैं कि सत्य तभी प्रभावी होता है जब बोलने वाला स्वयं उसे जिया हो — वरना वह सिर्फ शब्द बनकर रह जाता है। आचार्य जी स्पष्ट करते है कि नफ़रत और विरोध से डरने की आवश्यकता नहीं। जब लोग सत्य को सुनकर आहत होते हैं, तो वह उनके भीतर की जड़ता का संकेत है। इन प्रतिक्रियाओं को व्यक्तिगत रूप से लेने के बजाय धैर्य रखकर काम करते रहना चाहिए, परिवर्तन धीमा होता है — पर होता अवश्य है।