वीडियो जानकारी: 05.10.23, वेदांत संहिता, ग्रेटर नोएडा Title : बाहर गति रहे, भीतर ठहराव || आचार्य प्रशांत (2023) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत मौन, अहंकार और दुख के मिथ्यात्व पर चर्चा कर रहे हैं। वे बताते हैं कि सच्चा मौन सिर्फ़ चुप रहना नहीं है, बल्कि मन की सारी खटपट और भाग-दौड़ का खत्म हो जाना है। बाहर क्रियाएँ चलती रहें, पर भीतर यदि चाह और संघर्ष न हों, तो वही शांति है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि सत्य कोई चीज़ नहीं है जिसे पाया जा सके। सत्य तक पहुँचने का रास्ता है — झूठ को पहचानना और छोड़ना। आत्मज्ञान पाने का तरीका कुछ नया जोड़ना नहीं, बल्कि बेकार पकड़ को छोड़ना है। आचार्य जी समझाते हैं कि जब तक हम ‘मैं’ को मानते हैं, तब तक दुख बना रहता है।अगर ‘मैं’ है, तो वही दुख है, और जब समझ आता है कि अलग से कोई ‘मैं’ है ही नहीं, तो दुख भी मिथ्या है। जन्म और मृत्यु बस प्रकृति की प्रक्रियाएँ हैं, व्यक्तिगत नहीं।यही समझ हमें असली मौन, सत्य और मुक्ति की ओर ले जाती है।