🔥 4 National Bestsellers 🔥

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चार पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
5/5
6 Ratings & 1 Reviews
Description
सभी पाठकों के लिए चार पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई, और मौज + संघर्ष + समय + जानदार व्यक्तित्व + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई और मौज:

आजकल का युवा, खासतौर से भारत का, विभिन्न पारिवारिक, सामाजिक, शैक्षणिक व मीडिया, व्यावसायिक, शारीरिक दुविधाएँ, प्रेम व रिश्ते तथा गहरे अस्तित्ववान जीवन सम्बन्धी प्रश्नों से जुड़ी बहुधा चुनौतियों का सामना करता है। युवा वर्ग एक ऐसी नाज़ुक स्थिति में है जहाँ से ज़िंदगी में गलत मोड़ लेना काफी आसान है। आचार्य प्रशांत अपने एक अनोखे ही तरीके से युवा पीढ़ी की ऊर्जा और संघर्षों को संबोधित करते हैं। इस पुस्तक का यही उद्देश्य है कि आपको भी स्पष्टता मिले और अपने जीवन के निर्णय आप स्वयं अपनी सूझबूझ से कर सकें।

संघर्ष:

जीवन प्रतिपल संघर्ष तो है ही, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौनसा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं।

बड़ी लड़ाई वो है जो अपने विरुद्ध की जाती है, असली संघर्ष वो है जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, वैसे-वैसे हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं। इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत से समझने को मिलेगा कि सही संघर्ष कौनसा है, वह क्यों ज़रूरी है और यह कि आनंद तो स्वयं से जूझने में ही है।

समय:

इंसान का मन समय में ही जीता है और समय से ही सबसे ज़्यादा भयभीत रहता है। अतीत, वर्तमान और भविष्य — हम समय को इन तीन भागों में बाँटकर देखते हैं। मन या तो अतीत की स्मृतियों में खोया रहता है या भविष्य की कल्पनाओं में। पर यह कभी समझ नहीं पाता कि समय है क्या।

दुनियाभर के दार्शनिकों, विचारों और वैज्ञानिकों ने काल को गहराई से समझने का प्रयास किया है पर कुछ ही लोग हुए हैं जो काल को जानकार कालातीत में प्रवेश कर पाये हैं।

इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत समझा रहे हैं कि समय क्या है और कैसे हम इस महत्वपूर्ण संसाधन का सदुपयोग करके अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।

जानदार व्यक्तित्व:

जानदार व्यक्तित्व बाहर से खाल चमकाने से, रूप-रंग बनाने से या ज्ञान और भाषा-शैली परिष्कृत करने से नहीं आता। ये भीतर की बात होती है। हम सबको यही रहता है कि बाहरी व्यक्तित्व अच्छा हो। भीतर का हाल ठीक रखने में हमारी रुचि नहीं होती क्योंकि दिखाई तो चीज़ बाहर की ही देती है। अगर बाहर-बाहर ही दिखावा करके और रंग-रोगन करके काम चल जाता है तो भीतर झाँकने की और सफ़ाई करने की जहमत हम नहीं उठाते।

प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने ऊँचे व्यक्तित्वों के जीवन दर्शन और उनके लक्षणों के बारे में बड़े ही सहज तरीके से बताया है। एक जानदार व्यक्तित्व के मालिक बनने में यह पुस्तक पाठकों के लिए अवश्य सहायक सिद्ध होगी।
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क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है? आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
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