उड़ जाएगा हंस अकेला + इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना + मैं बेकैद, मैं बेकैद + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! उड़ जाएगा हंस अकेला + इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना + मैं बेकैद, मैं बेकैद + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
उड़ जाएगा हंस अकेला:
कबीर साहब के इस प्रसिद्ध निर्गुण भजन की व्याख्या करते हुए आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मृत्यु का स्मरण भय के लिए नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक पहचान को जानने के लिए है। यह पुस्तक सीमित अहम् से मुक्त होकर सत्य की ओर बढ़ने का आमंत्रण है।
इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना:
क्या है इश्क? आसमाँ में उड़ के जाना माने क्या? संत रूमी किस इश्क की बात कर रहे हैं?
प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत रूमी की प्रसिद्ध कविता “इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना” के मर्म को आज के संदर्भ में उद्घाटित करते हैं। वे बताते हैं कि वास्तविक प्रेम अहम्, सीमाओं और सामाजिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग है। यह पुस्तक एक ऐसी 'वेदांतिक चाबी' प्रस्तुत करती है जिससे रूमी के गूढ़ और रहस्यात्मक सूफी कलाम आज के पाठक के लिए पूरी स्पष्टता के साथ खुलने लगते हैं।
मैं बेकैद, मैं बेकैद:
हम संसार में सुख खोजते हैं, पर जो मिलता है वह पूर्ण संतुष्टि नहीं देता। यह पुस्तक बताती है कि विचार, नाम और पहचान ही हमारी वास्तविक कैद हैं। बाबा बुल्लेशाह के सूफ़ी काव्य "मैं बेकैद" की व्याख्या करते हुए आचार्य प्रशांत वेदांत के माध्यम से जीवनमुक्ति की संभावना को स्पष्ट करते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक केवल दार्शनिक बोध नहीं, बल्कि पाठक के लिए एक जीवंत आमंत्रण है — अपनी कैद को पहचानने का, और उससे मुक्ति की दिशा में पहला कदम उठाने का।