स्वामी विवेकानन्द और व्यावहारिक वेदान्त + संघर्ष + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

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दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
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स्वामी विवेकानन्द और व्यावहारिक वेदान्त + संघर्ष + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

स्वामी विवेकानन्द और व्यावहारिक वेदान्त:

स्वामी विवेकानन्द के पूर्ववर्ती ज़्यादातर अद्वैतवादी दार्शनिकों ने अपने वेदान्त दर्शन में ज्ञान पक्ष को अधिक महत्व दिया है। और यह अति आवश्यक भी है। पर अपने ही ढर्रों को बचाये रखने के लिए सामान्य लोगों में यह धारणा विकसित हो गयी कि अद्वैत वेदान्त केवल गूढ़ एवं तात्विक सिद्धान्तों का पुंज है, जो साधारण मानवीय बुद्धि के लिए अत्यन्त दुरूह है और जिसका प्रत्यक्ष जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं है। यह केवल संन्यासियों तथा चिन्तनशील दार्शनिकों के लिए उपयोगी है। गृहस्थ लोगों से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। यह जगत से पलायन अथवा संन्यास को बढ़ावा देता है, अतः यह निषेधात्मक एवं निराशावादी दर्शन है।

जनसामान्य में व्याप्त इस आत्मघाती धारणा के निवारण हेतु स्वामी विवेकानन्द जी ने वेदान्त की नवीन, परिष्कृत तथा आशावादी व्याख्या प्रस्तुत करने की आवश्यकता को महसूस किया। इसीलिए उन्होंने वेदान्त के आदर्शवादी पक्ष को व्यावहारिक रूप दिया तथा वेदान्त दर्शन को व्यावहारिक वेदान्त के रूप में प्रस्तुत किया।

संघर्ष:

जीवन प्रतिपल संघर्ष तो है ही, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौनसा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं।

बड़ी लड़ाई वो है जो अपने विरुद्ध की जाती है, असली संघर्ष वो है जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, वैसे-वैसे हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं। इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत से समझने को मिलेगा कि सही संघर्ष कौनसा है, वह क्यों ज़रूरी है और यह कि आनंद तो स्वयं से जूझने में ही है।
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