रहना नहीं देस बिराना है + घूँघट के पट खोल रे + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + उड़ जाएगा हंस अकेला + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

रहना नहीं देस बिराना है + घूँघट के पट खोल रे + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + उड़ जाएगा हंस अकेला + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

चार पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए चार पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
रहना नहीं देस बिराना है + घूँघट के पट खोल रे + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + उड़ जाएगा हंस अकेला + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

रहना नहीं देस बिराना:

यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि अध्यात्म संसार से भागना नहीं, बल्कि उसके साथ सही संबंध स्थापित करना है। यह जीवन को उसकी संपूर्ण गरिमा के साथ जीने की प्रेरणा देती है।

घूँघट के पट खोल रे:

आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मनुष्य की ऊर्जा प्रेम की होती है, जिसे सही दिशा देने के लिए ज्ञान आवश्यक है। यह पुस्तक अज्ञान और भ्रम के घूँघट को पहचानकर वास्तविक स्वतंत्रता और प्रेम की ओर बढ़ने का आमंत्रण है।

मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे:

यह पुस्तक कबीर साहब के कालजयी भजन की व्याख्या के माध्यम से दिखाती है कि जिस सत्य की खोज हम बाहर करते हैं, वह हमारे भीतर ही है। यह पाठक को अपनी मान्यताओं और भ्रमों को पहचानने की दृष्टि देती है।

उड़ जाएगा हंस अकेला:

कबीर साहब के इस प्रसिद्ध निर्गुण भजन की व्याख्या करते हुए आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मृत्यु का स्मरण भय के लिए नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक पहचान को जानने के लिए है। यह पुस्तक सीमित अहम् से मुक्त होकर सत्य की ओर बढ़ने का आमंत्रण है।
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