सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! प्रलय + आज़ादी 2.0 + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
प्रलय:
जलवायु परिवर्तन अब कोई आने वाला खतरा नहीं है। यह हमारे घर, हमारे शरीर, हमारे भोजन, हमारे भविष्य — सबको एक साथ निगल रहा है। लेकिन संकट जितना वास्तविक है, हमारी चेतना उतनी ही सुन्न।
प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत, वेदांत के आलोक में यह स्पष्ट करते हैं कि जलवायु संकट केवल एक पर्यावरणीय चुनौती नहीं है, बल्कि मनुष्य की जीवन-दृष्टि, उसकी इच्छाओं और मूल्यों से उपजा संकट है।
हर अध्याय एक गंभीर संवाद है — जो हमारी आदतों, सामाजिक व्यवस्था और मानसिक संरचनाओं की पड़ताल करता है। यह पुस्तक प्रश्न उठाती है — भीतर भी, बाहर भी।
▪️क्या सिर्फ नीति बदलावों या तकनीकी उपायों से यह संकट टल जाएगा? ▪️क्यों सबसे अधिक संकट में वे लोग हैं, जो इसके लिए सबसे कम ज़िम्मेदार हैं? ▪️कैसे हमारी उपभोगप्रियता और चुप्पी इस प्रलय की ज़मीन तैयार कर रही है? ▪️क्या अब भी कुछ किया जा सकता है?
यह किसी को दोष नहीं देती, पर यह भी नहीं कहती कि हम निर्दोष हैं। "प्रलय" कोई भविष्य की कहानी नहीं है। यह आज की स्थिति है, जिसे हम देखना नहीं चाहते। यह पुस्तक उसी को देखने को कहती है — जिसे टालना अब विनाश को चुनने जैसा है।
आज़ादी 2.0:
भारत की राजनीतिक आज़ादी के दशकों बाद भी हम अनेक तरीकों से कैद हैं - सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से। आचार्य प्रशांत कहते हैं: तब दुश्मन स्पष्ट था, आज का दुश्मन छिपा हुआ है. आज दुश्मन आपका हितैषी बनकर वार कर रहा है।
आज़ादी 2.0 सिर्फ़ एक किताब नहीं है, यह आचार्य प्रशांत द्वारा दिए उन गहरे संवादों का संकलन है जो आपको वास्तविक स्वतंत्रता से परिचित कराती है। इस पुस्तक का उद्देश्य आज़ादी को लेकर कोई सतही शोर-गुल करना नहीं बल्कि सालों पुरानी ग़ुलामी के पीछे छुपे कारणों को समझना है। वही कारण जो आज आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी आपके-हमारे बीच न केवल अपनी जड़ें जमाए हुए हैं, बल्कि और अधिक गहराई पा रहे हैं। वही कारण जो आपके और आपकी उच्चतम संभावना के बीच की बाधा हैं।
यह पुस्तक आपको उस व्यक्ति से मिलवाएगी जो आप हो सकते हैं। उस जीवन से मिलवाएगी जो आप जी सकते हैं। उस आकाश से मिलवाएगी जिसमें आप उड़ान भर सकते हैं।