मन मस्त हुआ + हमन है इश्क मस्ताना + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! मन मस्त हुआ + हमन है इश्क मस्ताना + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
मन मस्त हुआ:
कबीर साहब द्वारा रचा यह भजन उस मस्ती को प्रकट करने का प्रयास है, जिसकी तलाश में हम सभी रहते हैं। कभी वे इस मस्ती को हीरा कहते हैं, कभी हल्केपन से जोड़ते हैं, कभी हंस को मिले मानसरोवर की उपमा देते हैं, और कभी साहब के मिल जाने की बात करते हैं।
भजन की हर पंक्ति का पहला भाग उपमाओं के माध्यम से उस मस्ती को प्रकट करता है, और दूसरा भाग एक सहज प्रश्न उठाता है—जब इतना ऊँचा कुछ मिल गया है, जब जीवन में स्पष्टता का प्रकाश आ गया है, तो अब क्या संदेह बचा? भजन को गाने मात्र से जो आनंद आता है, यह पुस्तक आपको उस आनंद की जड़ तक ले जाने का आमंत्रण है।
यदि आप इस मस्ती को सिर्फ़ छूना नहीं, जीना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।
हमन है इश्क मस्ताना:
हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या!
ज़िन्दगी को यदि किसी ने छक के पिया है तो वो हमारे संत हैं। कबीर साहब का ये भजन अनूठा है। इश्क और प्रेम का जो अर्थ हम आम दिनचर्या में इस्तेमाल करते हैं, उसने प्रेम के असली अर्थ को विकृत कर दिया है। अक्सर ही हम हमारे सबसे स्थूल बंधनों को प्रेम का नाम दे देते हैं।
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत परत-दर-परत भजन के अर्थ को खोलते हैं और उस ऊँचे प्रेम से हमारा परिचय करवाते हैं जिसमें व्यक्ति किसी दूसरे से नहीं बल्कि अपने ही छुटपन से ऊँचा उठने में रत है। आशा है प्रेम के सच्चे और ऊँचे अर्थ को समझने और उसे जीवन में उतारने के लिए यह पुस्तक आपके लिए लाभदायक सिद्ध होगी।