मैं बेकैद, मैं बेकैद + संतवाणी + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

मैं बेकैद, मैं बेकैद + संतवाणी + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
मैं बेकैद, मैं बेकैद + संतवाणी + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

मैं बेकैद, मैं बेकैद:

हम संसार में सुख खोजते हैं, पर जो मिलता है वह पूर्ण संतुष्टि नहीं देता। यह पुस्तक बताती है कि विचार, नाम और पहचान ही हमारी वास्तविक कैद हैं। बाबा बुल्लेशाह के सूफ़ी काव्य "मैं बेकैद" की व्याख्या करते हुए आचार्य प्रशांत वेदांत के माध्यम से जीवनमुक्ति की संभावना को स्पष्ट करते हैं।

प्रस्तुत पुस्तक केवल दार्शनिक बोध नहीं, बल्कि पाठक के लिए एक जीवंत आमंत्रण है — अपनी कैद को पहचानने का, और उससे मुक्ति की दिशा में पहला कदम उठाने का।

संतवाणी:

वेदांत के गूढ़ सिद्धांतों को संतों ने सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाया, पर समय के साथ उनके वचनों का वास्तविक अर्थ धुंधला पड़ गया। आचार्य प्रशांत इस पुस्तक में संतों की वाणी का मर्म आज की भाषा में स्पष्ट करते हैं। यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो संतों की सीख को सही अर्थों में समझकर अपने जीवन को सही दिशा देना चाहते हैं।
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