जिन सतगुरु पहचाना नहीं + वारि जाऊँ मैं सतगुरु के + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! जिन सतगुरु पहचाना नहीं + वारि जाऊँ मैं सतगुरु के + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
जिन सतगुरु पहचाना नहीं:
कबीर साहब के इस प्रसिद्ध भजन की व्याख्या करते हुए आचार्य प्रशांत बताते हैं कि समस्या चाह की कमी नहीं, बल्कि सही पहचान की कमी है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि सतगुरु को पहचानने की शुरुआत अपनी समस्या, भय, भ्रम और पराश्रयता को पहचानने से होती है।
वारि जाऊँ मैं सतगुरु के:
गुरु तुम्हें कुछ देता नहीं है, वो तुम्हें पैदा करता है।
आचार्य प्रशांत इस भजन की व्याख्या करते हुए बताते हैं कि सच्चा समर्पण भावुकता नहीं, बल्कि ज्ञान की अंतिम परिणति है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि भक्तियोग और ज्ञानयोग अंततः एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं।