जो मैं बौरा तो राम तोरा + प्रेम प्याला जो पिए + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! जो मैं बौरा तो राम तोरा + प्रेम प्याला जो पिए + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
जो मैं बौरा तो राम तोरा:
अहंकार ऊँचाई तो चाहता है, पर उसे अपनी शर्तों पर पाना चाहता है। नतीजा होता है कि निर्णय उलझते हैं, रिश्ते बोझिल होते हैं, और भीतर एक बेचैनी बनी रहती है।
संत कबीर के प्रसिद्ध भजन की वेदान्तिक व्याख्या के माध्यम से आचार्य प्रशांत हमारे इसी अहंकार की परतों को खोलते हैं, जिसे हम अक्सर अपनी ‘मर्ज़ी' या 'स्वतंत्र इच्छा' समझ लेते हैं। वे बताते हैं कि जिसे हम अपना 'स्वभाव' कहते हैं, वह अक्सर पुरानी आदतों, सामाजिक दबावों और जैविक संस्कारों के हाथों की कठपुतली मात्र है। उसकी समस्या ज्ञान की कमी नहीं, बल्कि ये है कि वह ज्ञान को भी अपनी कहानी में खपा लेता है।
प्रस्तुत पुस्तक आपको अपनी ही धारणाओं, मान्यताओं और बाहरी परतों को पहचानने का साहस देती है, ताकि निर्णय अधिक साफ़ हों, और जीवन कहानी नहीं, स्पष्टता से संचालित हो। अहंकार की इन पुरानी परतों को उतारना और खुद का सामना करना अकेले कठिन लग सकता है। लेकिन संतों का साथ इस मार्ग को सुगम बना देता है।
प्रेम प्याला जो पिए:
प्रेम की जो अभिव्यक्ति हमें कबीर साहब की रचनाओं में देखने को मिलती है, वह अन्यत्र मिलना मुश्किल है। उनकी साखियाँ प्रेम की एक अद्वितीय और गहरी समझ प्रदान करती हैं, जो गहराई से आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों है।
प्रस्तुत पुस्तक में कबीर साहब के दोहों के माध्यम से प्रेम को व्यावहारिक रूप से समझाने का प्रयत्न किया गया है, कि प्रेम हमारे जीवन को रूपांतरित कर सकता है। जब हम बिना किसी अड़चन के प्रेम को अपने हृदय में उतरने देते हैं, मात्र तब ही हम वास्तव में जीवन के सौन्दर्य को देख पाते हैं।