इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना + प्रेम सीखना पड़ता है + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना + प्रेम सीखना पड़ता है + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना:
क्या है इश्क? आसमाँ में उड़ के जाना माने क्या? संत रूमी किस इश्क की बात कर रहे हैं?
जो रूमी विश्व भर में इश्क पर अपने कलामों के लिए आज भी इतने प्रसिद्ध हैं, एक समय पर वे एक बेहद सम्मानित विद्वान, न्यायविद और मौलवी थे, जो अपने परिवार के साथ एक गंभीर, प्रतिष्ठित और मर्यादित जीवन व्यतीत कर रहे थे। फक्कड़ और मस्तमौला फ़कीर शम्स से रूमी की मुलाकात ने उनकी पूरी चलती हुई व्यवस्था को धराशायी कर दिया। शम्स से ही रूमी ने प्रेम का वास्तविक अर्थ सीखा। परिणाम ये हुआ कि वो खुलापन, वो मौज रूमी के जीवन में भी उतर आई और सामाजिक प्रतिष्ठा की परवाह किए बिना सड़कों पर नृत्य के रूप में अभिव्यक्त हुई। शम्स के विरह में उपजी वही वेदना आगे चलकर रूमी के अमर कलामों का आधार बनी।
प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत रूमी की प्रसिद्ध कविता “इश्क है आसमाँ में उड़ के जाना” के मर्म को आज के संदर्भ में उद्घाटित करते हैं। यह पुस्तक एक ऐसी 'वेदांतिक चाबी' प्रस्तुत करती है जिससे रूमी के गूढ़ और रहस्यात्मक सूफी कलाम आज के पाठक के लिए पूरी स्पष्टता के साथ खुलने लगते हैं।
प्रेम सीखना पड़ता है:
हम जिसे प्रेम कहते हैं वह हम तक मात्र किस्से-कहानियों और फिल्मों के माध्यम से पहुँचा है। ये भी एक ग़लतफ़हमी है कि प्रेम नैसर्गिक होता है। प्रकृति में, जानवरों में जो प्रेम दिखता है वो प्राकृतिक सौहार्द हो सकता है, प्रेम नहीं।
प्रेम तो सीखना पड़ता है।
प्रेम वास्तव में है मन का निरंतर आकर्षण, सतत प्रवाह शांति की तरफ़। प्रेम का वरदान या प्रेम की संभावना तो बस इंसान को ही मिली है। वो भी संभावना मात्र है।