घूँघट के पट खोल रे + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

घूँघट के पट खोल रे + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
घूँघट के पट खोल रे + मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

घूँघट के पट खोल रे:

आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मनुष्य की ऊर्जा प्रेम की होती है, जिसे सही दिशा देने के लिए ज्ञान आवश्यक है। यह पुस्तक अज्ञान और भ्रम के घूँघट को पहचानकर वास्तविक स्वतंत्रता और प्रेम की ओर बढ़ने का आमंत्रण है।

मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे:

यह पुस्तक कबीर साहब के कालजयी भजन की व्याख्या के माध्यम से दिखाती है कि जिस सत्य की खोज हम बाहर करते हैं, वह हमारे भीतर ही है। यह पाठक को अपनी मान्यताओं और भ्रमों को पहचानने की दृष्टि देती है।
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