भारत + वेदान्त +  ज्वाला + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

भारत + वेदान्त + ज्वाला + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
भारत + वेदान्त + ज्वाला + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

भारत:

भारत को महान अगर कहने में रुचि रखते हो तो ख़ुद महान बनो, तुमसे ही है भारत की महानता। भारतीय अगर महान नहीं तो भारत महान कैसे हो सकता है?

बहुत महान लोग हुए हैं इस धरती पर। धर्म का पालना रहा है भारत, और विज्ञान का, और गणित का, और संगीत का भी पालना रहा है भारत ― इसलिए भारत महान था। उन लोगों की बदौलत भारत महान था।

आज भी वैसे लोग चाहिए। वैसे लोग होंगे तो भारत महान होगा, नहीं तो नहीं होगा। फिर ये तो कह लोगे कि इतिहास में पहले भारत महान था लेकिन ये नहीं कह पाओगे कि भारत आज भी महान है।

आज भारत को महान बनाना है तो अपने भीतर लोहा पैदा करो और सच की तरफ़ निष्ठा पैदा करो।

वेदान्त:

आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।

इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।

ज्वाला:

प्रस्तुत पुस्तक में आचार्य प्रशांत इन महापुरुषों के जीवन के उस संघर्ष से हम सबको परिचित करा रहे हैं, जो आम जनमानस तक आज तक नहीं पहुँच पाया है। आज भले ही हमने उन्हें महापुरुष कहकर सम्मानित किया है लेकिन जीवित रहते हुए उन्होंने केवल बाहरी ताकतों से ही नहीं, बल्कि सालों से हमारे अपने समाज द्वारा आत्मसात की गई रूढ़ियों, अंधविश्वास और ग़ुलामी की वृत्ति से लड़ाई की ताकि हम बंधनमुक्त और गरिमापूर्ण जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।
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