सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! आज़ादी 2.0 + संघर्ष + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
आज़ादी 2.0:
भारत की राजनीतिक आज़ादी के दशकों बाद भी हम अनेक तरीकों से कैद हैं - सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से। आचार्य प्रशांत कहते हैं: तब दुश्मन स्पष्ट था, आज का दुश्मन छिपा हुआ है. आज दुश्मन आपका हितैषी बनकर वार कर रहा है।
आज़ादी 2.0 सिर्फ़ एक किताब नहीं है, यह आचार्य प्रशांत द्वारा दिए उन गहरे संवादों का संकलन है जो आपको वास्तविक स्वतंत्रता से परिचित कराती है। इस पुस्तक का उद्देश्य आज़ादी को लेकर कोई सतही शोर-गुल करना नहीं बल्कि सालों पुरानी ग़ुलामी के पीछे छुपे कारणों को समझना है। वही कारण जो आज आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी आपके-हमारे बीच न केवल अपनी जड़ें जमाए हुए हैं, बल्कि और अधिक गहराई पा रहे हैं। वही कारण जो आपके और आपकी उच्चतम संभावना के बीच की बाधा हैं।
यह पुस्तक आपको उस व्यक्ति से मिलवाएगी जो आप हो सकते हैं। उस जीवन से मिलवाएगी जो आप जी सकते हैं। उस आकाश से मिलवाएगी जिसमें आप उड़ान भर सकते हैं।
क्योंकि उड़ान अभी बाक़ी है! आसमाँ अभी बाक़ी है!
संघर्ष:
जीवन प्रतिपल संघर्ष तो है ही, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौनसा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं।
बड़ी लड़ाई वो है जो अपने विरुद्ध की जाती है, असली संघर्ष वो है जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, वैसे-वैसे हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं। इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत से समझने को मिलेगा कि सही संघर्ष कौनसा है, वह क्यों ज़रूरी है और यह कि आनंद तो स्वयं से जूझने में ही है।